यूट्यूब और टिकटॉक पर गालीगलौज वायरल क्यों? || आचार्य प्रशांत (2020)

September 19, 2020 | आचार्य प्रशांत

कई तल होते हैं बात करने के ना? दूसरे से संवाद करने के, संपर्क करने के, वार्ता करने के कई तरीक़े होते हैं। और ये तरीक़े दो चीज़ों पर निर्भर करते हैं - तुम कैसे हो, और वो दूसरा व्यक्ति कैसा है।

ऊँचे-से-ऊँचे तरीक़ा तो मौन भी बताया गया है कि - कुछ बोलो नहीं, तो भी बातचीत हो जाती है। फिर एक तरीक़ा होता है स्पर्श का, कि कई बार बस किसी को ज़रा-सा ऐसे इशारा कर दो, या छू दो इतना-सा, इतने से उसको पता चल जाता है कि कहना क्या चाहते हो। फिर एक तरीक़ा होता है भाषा का, और फिर एक तरीक़ा होता है ध्वनि का।

तो तुम किस तरीक़े से अपनी बात दूसरे तक संप्रेषित करते हो, वो इस पर निर्भर करता है कि तुम कौन हो, और दूसरे को क्या समझ रहे हो।

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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