दर्द आज है, दवा अगले जन्म में चाहिए?

January 31, 2021 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कई बार हमें समझाया जाता है कि जो इस जन्म में परमात्मा को पा लेता है वही बुद्धिमान पुरुष है, तो इसी जन्म में उसे पा लो। इसमें जो जन्म की बात की जा रही है तो क्या अगला जन्म भी होता है? इस विषय में थोड़ा समझाइए।

आचार्य प्रशांत: यह तो सहज ही और बिलकुल प्रकट बात है- तुम्हें तकलीफ अभी है, तुम उसको अगले जन्म में मिटाओगे क्या? सारा अध्यात्म क्यों है? तुम क्यों किसी भी तरह की साधना कर रहे हो? तुम्हें कोई भी ज्ञान क्यों चाहिए? क्या तुम आनंद में हो? विश्राम में हो? सहज हो? अगर हो तो घर जाओ, जंगल जाओ, जन में जाओ, वन में जाओ, कुछ भी करो सब ठीक है।

बिलकुल मूलभूत बात पूछ रहा हूँ। पहली बात - कोई ये सब क्यों करे? उपनिषद क्यों पढ़े भाई? कोई दैवीय आज्ञा तो है नहीं कि पैदा हुए हो तो उपनिषद पढ़ने ही पड़ेंगे। क्यों आओ उपनिषद की तरफ? उपनिषदों की तरफ हम इसलिए आते हैं क्योंकि हम कष्ट में हैं। उस कष्ट का अनुभव तुम्हें कब हो रहा है? अभी। तो उसका समाधान तुम अगले जन्म में ढूँढोगे क्या? कि अभी अच्छे कर्म करो ताकि आगे अच्छा फल मिलेगा, ये बात ही कितनी हास्यास्पद है।

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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