बड़े सेलिब्रिटी और छोटे लोग

May 15, 2021 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आज आप से सेलेब्रिटी-कल्चर (सेलिब्रिटी संस्कृति) के बारे में बात करना चाहता हूँ। एक आम आदमी का मन इन सेलिब्रिटीज़ से, क्रिकेटर्स से, फिल्मस्टार्ज़ से इतना ज़्यादा क्यों डॉमिनेटेड (शासित) रहता है? उन्हीं के बारे में सोचते हैं, उन्हीं के जैसा हो जाना चाहते हैं, उनकी जैसी बॉडी (शरीर) चाहते हैं।

आचार्य प्रशांत: लालच है और डर है। देखो, हर इंसान अपनी ज़िन्दगी से नाखुश है। कोई भी नहीं है जिसके मन में संतुष्टि हो। लेकिन लगता सबको यही है कि कोई तो और होगा जो शायद संतुष्ट होगा, जिसको ज़िन्दगी में सब कुछ मिल गया है जो होना चाहिए। तो फ़िर हम इन लोगों की ओर देखते हैं जिन्हें आप सेलिब्रिटीज़ बोलते हो। और उनको देखते हैं, उनसे डरते भी हैं, उनके जैसा बन भी जाना चाहते हैं, यही आम-आदमी की कहानी है। ये जाँचपड़ताल कोई नहीं करता है कि जिसकी ओर तुम देख रहे हो उसकी अपनी ज़िन्दगी कैसी है, उसके मन का अपना आंतरिक माहौल कैसा है, उसको क्या वाकई वो सब कुछ मिला है जिसकी तुमको चाहत है?

चकाचौंध की बात है बस और कुछ नहीं। इसी चकाचौंध में फँसकर आम-आदमी अपनी पूरी ज़िन्दगी गुज़ार देता है, ख़राब कर लेता है, मर जाते हैं।

Share this article:


ap

आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

सुझाव