पैसे और रोज़गार को लेकर कुछ सवाल

April 25, 2021 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम! जी मेरा नाम सूरज है और मैं उत्तरांचल का रहने वाला हूँ। अभी मैं चार-पाँच साल से एक जॉब कर रहा हूँ। जो ब्लूटोकाई नाम की कंपनी है उसमें कॉफ़ी का काम होता है। उसमें सर्विंग का काम, होटल उद्योग ये सभी है। तो इसकेे साथ-साथ मैंने लॉकडाउन में कुछ काम शुरु किया है, मोमोज बनाने का और इसके साथ और भी प्रकार है। जैसे कि सोया चाप हो गई, ये सब चीज़ें भी हो गई। पर इसमें बहुत ज़्यादा आय नहीं हो पा रही है। तो लॉकडाउन में मैंने ये शुरू इसलिए किया था क्योंकि जॉब में उन्होंने मेरे को ब्रेक दे दिया था। उन्होंने कहा था कि अभी परिस्थिति अच्छी नहीं है तो काफ़ी लोगों को उन्होंने निकाल दिया था। तो अब फ़िर उन्होंने दोबारा बुला दिया तो मैं दोबारा जुड़ गया हूँ। पहले मैं सिनेमा में जॉब करता था, फ़िर पिज्जा हट में किया, फ़िर मैंने स्टारबक्स में किया, फ़िर इसके बाद ब्लूटोकाई में किया इस तरीके जॉब चलता ही जा रहा है। मगर अभी कुछ साफ़ नहीं हो पाया कि क्या करूँ, क्या ना करूँ? बेचैनी सी रहती है, क्या काम करूँ, क्या ना करूँ?

आचार्य प्रशांत: खर्चें कैसे हैं?

प्र: खर्चे तो सर सामान्य ही हैं। मतलब वहाँ पर जाना है…

आचार्य: तुम्हारे अपने खर्चें कैसे हैं?

प्र: अपने खर्चे मैं सर क्या बताऊँ। मतलब मेरे पास तो वैसे कुछ है नहीं ख़र्चा तो।

आचार्य: शादी-शुदा हो?

प्र: जी नहीं।

आचार्य: और कोई क़र्ज़ वगैराह ऐसा कुछ?

प्र: नहीं-नहीं कुछ भी नहीं है सर।

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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