अब तो सुधर जाओ, कल मौका मिले न मिले

December 9, 2020 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन ने मुझे मेरे कई ढर्रों से आज़ाद कर दिया। बहुत कुछ जो छूट ही नहीं रहा था अपने आप छूट गया। पर कल से लॉकडाउन खुल सकता है, वैसे भी सब धीरे-धीरे नॉर्मल होता जा रहा है। मुझे ये लॉकडाउन हमेशा के लिए चाहिए। कुछ रास्ता बताइए।

आचार्य प्रशांत: ज़िंदगी की छोटी से छोटी, साधारण से साधारण स्थिति भी आपके सामने आती है तो अगर आपकी सुधरने की, सीखने की नीयत है तो उस स्थिति के बाद आप वैसे ही नहीं रह जाएँगे जैसे कि आप उस स्थिति के पहले थे।

वास्तव में जीवन की हर स्थिति आपके सामने आती ही आपको कुछ सिखाने के लिए है, बेहतर बनाने के लिए है।

या ऐसे कह लीजिए कि जीवन की हर स्थिति में आपके लिए यह संभावना होती है कि उसे स्थिति का उपयोग करके कुछ सीख ले, जान ले, बेहतर हो जाएँ। यह मैंने बात करी जीवन की किसी भी साधारण स्थिति की। अभी जो वैश्विक आपदा हमारे सामने है, वह तो निश्चित ही असाधारण है। जो लोग इस आपदा के बाद भी वैसे ही रह जाएँ जैसा वो इसके पहले थे, वह तो फिर बहुत ही जड़ और ढीठ हुए। उन्होंने तो फिर ध्यान रखी है कि जीवन से कुछ सीखना ही नहीं है, अहंकार उनका इतना सघन हो चुका है कि वह बदलने को, पिघलने को राज़ी ही नहीं हैं। तो इस महामारी के प्रति भी दो तरह का रवैया रखने वाले, दो कोटियों के लोग, आपको देखने को मिलेंगे- पहले वो, जो लगातार इन दिनों आपने लॉकडाउन की बात करी, इसी कामना में, इसी प्रार्थना में इसी प्रयत्न और जुगाड़ में लगे होंगे कि किसी तरीके से पहले वाले हालात वापस आ जाएँ, ये पहली कोटि के लोग हैं।

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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