विद्या-अविद्या क्या, बंधन-मुक्ति क्या?

January 25, 2021 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, विद्या और अविद्या क्या है?

आचार्य प्रशांत: जो जन्म ले वो है, अविद्या और जिससे अहम भाव समाप्त हो जाए वो है, विद्या। ध्यान से समझेंगे।

देखिए, इस पर बड़ा संशय रहा है और बड़े तरीकों से विद्या और अविद्या की परिभाषा करने की कोशिश की गई है। मेरी दृष्टि जहाँ तक जाती है वो मैं कहता हूँ।

दो तरह का ज्ञान हो सकता है। एक ज्ञान वो जिसमें मात्र विषय की, जो दिखाई पड़ रहा है, जो ऑब्जेक्ट (वस्तु) है, उसकी बात उसकी बात होती है, उसको कहते हैं, अविद्या।

ठीक है?

और वो ज्ञान जिसमें आप ना सिर्फ़ विषय को, बल्कि विष्येता को भी देख रहे हो, ना सिर्फ़ ऑब्जेक्ट को बल्कि, सब्जेक्ट को भी देख रहे हो, उसको कहते हैं विद्या।

समझ रहे हो बात को?

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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