भगवती महामाया – दुःख की स्रोत भी और मुक्ति दायिनी भी || दुर्गासप्तशती पर (2021)

January 3, 2022 | आचार्य प्रशांत

आचार्य प्रशांत: तो ऋषि मारकंडेय हैं मार्कंडेय पुराण में और वे अपने शिष्यों को दीक्षा दे रहे हैं, सुना रहे हैं, समझा रहे हैं। और शिष्यों में कौन हैं? पक्षी हैं। तो ऐसा ही है, भाई। पुरुष प्रकृति को कुछ कह रहा है तो प्रकृति पक्षी का रूप लेकर भी तो हो सकती है न? तो उसी मार्कंडेय पुराण से दुर्गा सप्तशती का प्रादुर्भाव है। तेरह अध्याय हैं सप्तशती में। नाम से ही स्पष्ट है कि सात सौ श्लोक होंगे। और जो तेरह अध्याय हैं, ये तीन चरित्रों में बांटे जा सकते हैं।

जो तीन चरित्र हैं, वो तीन तरह के अज्ञान और दंभ, और मद और मोहरूपी राक्षसों को केंद्र में रखकर हैं। जो पहला चरित्र है, उसमें सिर्फ़ पहला अध्याय आएगा। उसमें मधु और कैटभ का संहार होता है। जो दूसरा चरित्र है, उसमें अध्याय क्रमांक दो से चार तक आते हैं, जिसमें महिषासुर का संहार होता है। और फिर जो तीसरा चरित्र है, उसमें पाँचवे अध्याय से लेकर के तेरहवें अध्याय तक सम्मिलित होते हैं, जिसमें शुंभ निशुंभ का संहार होता है। ठीक है?

और संहार करने वाली भी जो तीन देवियाँ हैं, वो वास्तव में महाप्रकृति के तीन गुणों का प्रतिनिधित्व करती हैं। प्रथम चरित्र में तमोगुणी महाकाली हैं, दूसरे चरित्र में रजोगुणी महालक्ष्मी हैं और तीसरे चरित्र में सतोगुणी महा सरस्वती हैं। ठीक है?

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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