पाँच नाम बेहोशी के

January 27, 2021 | आचार्य प्रशांत

आचार्य प्रशांत: पंचवर्ग क्या है -- जैसे माया के ही पाँच रूपों, पाँच वर्गों की बात की जा रही हो। आत्मा के ऊपर उपाधि बन कर -- अज्ञान, अविद्या या माया सत्य को छुपाए रहती है, ढके, आच्छादित किये रहती है। उसी अज्ञान को पाँच अलग-अलग तरीकों से कहा गया है पंच वर्ग में।

एक तरीका है कहने का कि -- "सत्य को या आत्मा को प्रकृति ने अपने तीन गुणों से ढक रखा है।" तो ये पहला वर्ग हो गया -- त्रिगुणात्मक प्रकृति का।

दूसरा तरीका हो गया कहने का कि -- "मन समेत जो अंतःकरण चतुष्टय के चार विभाग हैं, उन्होंने आत्मा को ढक रखा है।" तो मन समेत ये चार विभाग कौन से हुए -- मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार। तो ऐसे भी कहा जा सकता है कि इन्होने ढक रखा है आत्मा को।

या आप कह सकते हैं कि -- "जो जीव की प्राण से आसक्ति है, जिसके कारण वो अपने आप को जीवित कहता है, तो उन चौदह प्राणों(माने चौदह प्रकार की वायु) ने सत्य को ढाँक रखा है।" तो ये तीसरा तरीका हो गया कहने का।

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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