भीतर और बाहर के दैत्यों के संहार का वास्तविक अर्थ || श्रीदुर्गासप्तशती पर (2021)

January 8, 2022 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जिस तरह से दैत्यों की सेना के बारे में बताया है कि बहुत शक्तिशाली हैं, बहुत सारे सैनिक हैं, तो ये क्या जो हमारी वृत्तियाँ हैं, उनकी शक्तियों के बारे में बताया जा रहा है?

आचार्य प्रशांत: बिल्कुल वही है, बिल्कुल वही बात है।

प्र: उनकी शक्ति के आगे देवी ही हैं जो उनका सामना कर सकीं। तो देवी के प्रकट होने का क्या मतलब है? वृत्तियाँ तो हमेशा हमारे अंदर रहती हैं, तो देवी के प्रकट होने का क्या मतलब है?

आचार्य: आपके भीतर जो भी अच्छाइयाँ हैं, जो भी सद्गुण हैं, उनके ऊपर से यह भार हटाइए कि वो आपके अहंकार की रक्षा करने में प्रयुक्त रहें। उदाहरण के लिए, आपके पास बुद्धि है, बुद्धि भी देवी का एक रूप है, दैवत्व का एक रूप है; बुद्धि के ऊपर से यह ज़िम्मेदारी बिल्कुल हटा दीजिए कि बुद्धि आपके अहंकार की रक्षा करे। बुद्धि का प्रयोग दोनों चीज़ों के लिए हो सकता है न – अहंकार की रक्षा के लिए, सत्य की साधना के लिए या सत्य के शोध के लिए।

आपके पास धैर्य है, धैर्य के ऊपर से यह कर्त्तव्य बिल्कुल हटा दीजिए कि तुझे मेरे रेत के पुतले को बचाने के लिए प्रयुक्त होना है।

Share this article:


ap

आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

सुझाव