पुराणों की कथा तो कपोल कल्पित होती हैं, फिर इनका क्या महत्त्व है? || श्रीदुर्गासप्तशती पर (2021)

January 6, 2022 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: दुर्गासप्तशती के प्रथम चरित्र में दो असुर मधु और कैटभ के बारे में बात हुई है, क्या वो एक तरीके से वृत्ति के ही रूप हैं?

आचार्य प्रशांत: आप अगर निद्राग्रस्त हो, कौन सी निद्रा? चेतना की निद्रा, तो आपके शरीर का मैल ही असुर है। जब आप माया के आधीन होकर सो जाते हो तो आपका शरीर ही असुर है। शरीर माने शारीरिक वृत्तियाँ, वही असुर हैं।

यह बड़ी उपलब्धि का काम है। बड़ी विशेषज्ञता का काम है कि जो अस्तित्वगत सिद्धांत हैं, उनको किस तरीके से कथा के माध्यम तक जनसामान्य तक लाया जाए। तो आप पुराणों में जितनी कथाएँ पाते हो, वह वास्तव में यही प्रयत्न कर रही हैं। जनसामान्य तक तुम अगर बिल्कुल श्रुति के श्लोक लाओगे तो वे समझ नहीं पाएँगे, तो श्रुति के ही सिद्धांतों को कथाओं के माध्यम से लोगों तक लाया जाता है। अब लेकिन फिर यह ज़रूरी होता है कि उन कथाओं का उपयोग सिद्धांतों तक पहुँचने के लिए किया जाए, उन कथाओं को ही सत्य न मान लिया जाए।

Share this article:


ap

आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

सुझाव