क्या खोज रहे हैं हम?

March 2, 2021 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: क्या खोज रहे हैं हम?

आचार्य प्रशांत: यह जितना कुछ हम देखते हैं, यह जो कुछ भी हम अनुभव करते हैं, सुनते हैं, इसका अनुभव हमें यूँ ही नहीं हो रहा। थोड़ा गौर करेंगें तो आपको भी दिखेगा। कुछ भी आपको व्यर्थ ही नहीं दिख रहा, अकारण ही नहीं अनुभव हो रहा। कोई भी ध्वनि, कोई भी स्पर्श, कोई भी विचार आप तक निष्प्रयोजन ही नहीं पहुँच रहा। हम अपने सब अनुभवों में कुछ खोज रहे हैं। वास्तव में यह कहना भी ठीक नहीं है कि हम अनुभावों में कुछ खोज रहे हैं, चूँकि हम खोज रहे हैं इसलिए हम अनुभव ले रहे हैं, बात समझिएगा।

चूँकि हम खोज रहे हैं इसलिए हम अनुभव ले रहे हैं। सब अनुभव किसके होते हैं? अनुभवों के लिए क्या चाहिए? विषेयता, जो हम हैं ही। और क्या चाहिए अनुभवों के लिए? विषय। चूँकि हम खोज रहे हैं इसीलिए एक विषय से दूसरे विषय तक भटकते रहते हैं। भाई! खोजना है तो कहाँ खोजोगे? किसी विषय में ही खोजोगे ना? मुझे कुछ खोजना है तो कहाँ खोजूँगा? तो उस कमरे में खोजूँगा, उस कमरे में खोजूँगा, अपनी जेब में खोजूँगा, किसी और से जाकर कुछ पूँछूँगा, छत पर खोजूँगा, नीचे खोजूँगा। यही सब तो करूँगा?

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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