क्षेत्र, क्षेत्रज्ञ, भोक्ता, साक्षी

February 14, 2021 | आचार्य प्रशांत

आचार्य प्रशांत: क्षेत्रज्ञ क्या? साक्षी क्या? समझते हैं। क्षेत्रज्ञ का सम्बन्ध निश्चित रूप से, किसी क्षेत्र से ही होगा। 'क्षेत्रज्ञ' माने क्षेत्र का ज्ञाता। अच्छा, किस क्षेत्र की बात हो रही है? वो जो क्षेत्र है, वो हमारे अनुभव का क्षेत्र है। ठीक है? जो कुछ भी अनुभूत है, जो कुछ भी भासित होता है, वह क्षेत्र में आता है। क्षेत्र समझ लो अच्छे से। तो जो दिखाई देता है, उसका अनुभव होता है। ठीक है? तो वह क्षेत्र में आया। जो सुनाई देता है उसका अनुभव होता है? अनुभव होता है या नहीं होता है यह कैसे पता करें? जो भी चीज़ मन को हिला जाए, जो भी चीज़ मन पर निशान छोड़ जाए, मन में अंकित हो जाए, उसको हम अनुभूत वस्तु मानेंगे, कि इसका अनुभव हुआ।

अनुभव का और तो कोई तकाज़ा होता ही नहीं न, अनुभव की एक मात्र कसौटी क्या है? अनुभोक्ता। अनुभोक्ता कौन है? मन। मन कम्पित हो गया तो अनुभव हो गया, और मन पर कोई प्रभाव नहीं हुआ तो अनुभव नहीं हुआ। तो जो स्पर्श करते हो उसका अनुभव होता है?

श्रोतागण: हाँ।

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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