दारू और चिकन वाली होली?

March 30, 2021 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, होली पर लोग चिकन (मुर्गा) और शराब का सेवन करते हैं, इस पर कुछ कहें क्योंकि मैं समझा-समझा कर थक गया हूँ, मेरी तो नहीं सुनते।

आचार्य प्रशांत: होली का मतलब होता है: होलिका के दहन पर मनाया जाने वाला पर्व, है न? होलिका के दहन पर। और ज़्यादातर लोग होली ऐसे मनाते हैं जैसे होलिका को सम्मानित कर रहे हों।

जो कुछ होली के नाम पर होता है उसमें प्रह्लाद तो कहीं नहीं है, उसमें होलिका-ही-होलिका है। लोगों ने ये जो नाम है होली, लगता है इसका कुछ गलत अर्थ कर लिया। उन्हें लगा होली का मतलब है कि आज होलिका माता को याद करना है और उनको प्रेम से श्रद्धांजलि अर्पित करनी है, बेचारी ने अपनी शहादत दी थी आज।

होली का मतलब समझते हैं हम, क्या है? होली का मतलब है कि कोई भी कीमत देनी पड़ जाए और कितना भी ताकतवर हो झूठ, उसका साथ नहीं देना है। हिरण्यकश्यप सिर्फ राजा ही नहीं था, प्रह्लाद का बाप भी था। और उस छोटू ने कहा कि तुम चाहे राजा हो चाहे बाप हो मेरे, तुम्हारा साथ तो नहीं दूँगा। और वो कोई साधारण राजा नहीं था, वो वरदान प्राप्त राजा था, अगर पौराणिक कथा पर विश्वास करें तो।

कथा कहती है कि उसने वरदान ले लिया था कि दिन में नहीं मरेगा, रात में नहीं मरेगा, अस्त्र से नहीं मरेगा, शस्त्र से नहीं मरेगा, वगैरह-वगैरह; आदमी से नहीं मरेगा, पशु से नहीं मरेगा। बड़ा खतरनाक राजा था। समझ रहे हैं बात को? इतना खतरनाक था कि उसने पूरे राज्य में पाबंदी कर दी थी कि, "भई अब कोई किसी सत्य का या ईश्वर वगैरह का नाम नहीं लेगा, मेरी पूजा करो, मेरी। क्योंकि सत्य अमर होता है न और अनंत, जिसका कोई अंत नहीं हो सकता, मेरा भी अंत नहीं हो सकता क्योंकि मर तो अब मैं सकता ही नहीं। जो न जल में मर सकता न थल में मर सकता, न दिन में मर सकता न रात में मर सकता वो तो अमर ही हो गया। तो मैं ही अमर हूँ, तो मैं ही सत्य हूँ, तो मेरी ही पूजा करो।"

और वो छुटके ने बोला कि नहीं, नहीं चलेगा। जैसा वो राजा खतरनाक था वैसे ही वो बाप खतरनाक था क्योंकि उसकी ज़बरदस्त एक बहन थी। और बहन के पास कहते हैं कि एक शक्ति थी। कहीं कहा जाता है कि एक दुशाला जैसा था जो अग्नि-रोधी था, फायरप्रूफ, कि वो उसको पहन लेती थी तो वो आग से भी गुजर सकती थी, उसको आग नहीं लगती। और पूरा राज्य मान रहा है राजा साहब की बात, छोटे ने मानने से मना कर दिया। बोला, "मैं तो नहीं मानता!"

तो राजा ने कहा कि, "अब अपने हाथों से इसको क्या मारूँ, बुरा लगेगा।" पहले तो उसको बहुत लालच दिए और बहुत डराया धमकाया भी। वो काहे को माने? बोला, "मैं नहीं मानता। आप होंगे मेरे बाप, चाहे आप होंगे राजा, चाहे आप होंगे वरदान प्राप्त, मैं नहीं मानता तो नहीं मानता। मेरे लिए सच ही सच है, सच ही बाप है; कोई बाप सच से बड़ा नहीं होता।"

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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