तुम कमज़ोर हो, इसलिए लोग तुम्हें दबाते हैं

May 25, 2021 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मैं बचपन से एक धार्मिक परिवार में पला बढ़ा हूँ। बचपन से पूजा-पाठ हमारे घर में चलती थी, रामायण-महाभारत हमारे घर में चलता था तो उन सब का देखा-देखी मैं भी सब से रामायण महाभारत देखकर सबके साथ शेयर (साझा) करता था तो लोग खुश होते थे और मुझे भी एक तरह का प्रोत्साहन मिलता था। पर जैसे-जैसे मैं जीवन में आगे बढ़ा, ग्यारहवीं-बारहवीं में आया तो इन चीजों से अरुचि हो गई। अब पिछले साल लॉकडाउन के कारण मैं घर में रहा तो काफी फ्री टाइम (खाली समय) था मेरे पास। उस फ्री टाइम में मैंने आपके वीडियोज़ और लेक्चर सुनना शुरू किया। मेरा फिर से स्पिरिचुअलिटी (अध्यात्म) की तरफ ध्यान बढ़ गया और मैं आपकी वीडियो अपने दोस्तों-रिश्तेदारों से शेयर करने लगा, लेकिन अब वो इतना विरोध क्यों कर रहे हैं?

आचार्य प्रशांत: मुझे नहीं पता वो क्या कर रहे हैं। वो थोड़े ही शिविर में आए हैं। तुम छोटे से बच्चे हो क्या कि मम्मी-पापा की शिकायत दूसरे डैडी जी से करने आए हो? और छब्बीस की उम्र में जिससे तुम बात कर रहे हो, वो भी अगर ऐसे ही किसी की शिकायत किसी से कर रहा होता तो आज मैं तुम्हारे सामने बैठा होता?

मैं क्यों इस बात पर ध्यान दूँ कि तुम्हारे मम्मी-पापा तुम्हें रामायण-महाभारत पढ़ाते थे कि नहीं पढ़ाते थे, आज वो तुम्हारी रुचियों को पसंद करते हैं कि नहीं करते हैं? ये उनका मामला है, वो जब शिविर में आएँगे तो उनसे बात कर लूँगा। तुम अपनी बताओ?

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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