विदेशी पत्रिका द्वारा भारतीय देवी-देवताओं पर मज़ाक || (2021)

November 5, 2021 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: फ्रांस की पत्रिका है चार्ली हेबडो। व्यंग्य संबंधित ही इनकी ज़्यादातर समाग्री रहती है। अतीत में भी ये पत्रिका काफी चर्चा और विवाद में रही है। अभी हाल में ही, कल-परसों ही इन्होंने एक कार्टून छापा है जिसमें भारतीयों को ऑक्सिजन के अभाव में तड़पते और दम तोड़ते हुए दिखाया जा रहा है। और फिर उस कार्टून में इन्होंने तंज कसते हुए ये सवाल किया है कि कहाँ गए भारतियों के लाखों-करोड़ों देवी-देवता? इतने सारे आपके देवी-देवता हैं तो वो आपके लिए ऑक्सिजन क्यों नहीं पैदा कर सकते ऐसा चार्ली हेबडो ने व्यंग्य करा है।

हिंदुओं को कमज़ोर समझकर कोई भी हमारे धर्म की खिल्ली उड़ा देता है, ये बात मुझे बहुत क्रोधित करती है।

आचार्य प्रशांत: एक क्रोधित प्रतिक्रिया प्राकृतिक रूप से आपमें उठ रही है और भी जो हिंदू लोग हैं उनमें ये प्रतिक्रिया उठेगी। और बात भी जो इस पत्रिका ने कही है वो मूर्खता की ही है, फूहड़ बात है। इसमें कोई दो राय नहीं लेकिन अपने क्रोध से थोड़ा हटकर के अगर हम समझना चाहें कि ये पत्रिका इस तरह की अनर्गल बात कर कैसे पाई तो वो हमारे लिए बेहतर होगा।

कैसे कर पाई?

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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