कर्ता कौन है? जीव कौन है?

September 9, 2021 | आचार्य प्रशांत

आचार्य प्रशांत: “कर्ता कौन है? जीव कौन है?” उपनिषद् ने यहाँ भी बड़े संक्षेप में उत्तर दिए हैं। कर्ता वो है जिसे सुख और दु:ख की अभीप्सा है। जिसे सुख और दु:ख की अभीप्सा है उसका नाम कर्ता है; क्योंकि वो जो कुछ भी करता है किस लिए करता है? सुख पाने के लिए, दु:ख से बचने के लिए; कर्म का और कोई आधार होता ही नहीं है।

श्लोक छः पर ध्यान दो —

“सुख प्राप्त करने और दुःख का परित्याग करने के लिए जीव जिन क्रियाओं को करता है, उन्हीं के कारण वो कर्ता कहलाता है।"
~ (सर्वसार उपनिषद्, श्लोक ६)

उपनिषद् ने कर्ता की परिभाषा बताई है। सुख पाने के लिए, दु:ख से बचने के लिए जो कुछ भी तुम करते हो वो तुम्हें कर्तृत्व दे देता है। हर कर्म के पीछे उद्देश्य, भावना एक ही है — सुख।

इसी तरीके से जीव के बारे में क्या कहा उपनिषद् ने?

“जब पाप-पुण्य का अनुसरण करता आत्मा इस शरीर को अप्राप्त की तरह मानता है, तब वह उपाधियुक्त जीव कहलाता है।“
~ (सर्वसार उपनिषद्, श्लोक ६)

जब तुम्हें कुछ लगता है करने जैसा, कुछ लगता है ना करने जैसा, कुछ तुम्हारे लिए प्राप्य होता है, कुछ अप्राप्य होता है, तो जो तुम्हें लगता है कि करने में शांति है, विभूति है उसको तुम कह देते हो — पुण्य है। जो तुम्हें लगता है कि करने में अपकीर्ति है और क्षति है उसको तुम कह देते हो — पाप।


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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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