हम डरते क्यों हैं?

December 22, 2013 | आचार्य प्रशांत

आचार्य प्रशांत: हम में से कितने लोग हैं जो कभी-न-कभी या अक्सर डर अनुभव करते हैं? कृपया अपना हाथ उठाएँ!

(करीब-करीब सभी अपने हाथ उठा लेते हैं)

आचार्य (हाथ उठाते हैं): मैं भी आपके साथ हूँ, तो मेरा भी हाथ उठा हुआ है।

(श्रोतागण मुस्कुराते हैं)

हम में से शायद ही कोई ऐसा हो जो डर से अछूता हो। कोई भी नहीं होगा। ये डर है क्या? आपमें से कितने लोगों को कुछ लोगों के सामने, या एक भीड़ के सामने सार्वजनिक रूप से बोलने में डर लगता है? चलो तुममें से ही किसी एक को लेते हैं।

नदीम, तुम ज़रा खड़े हो जाओ। (एक श्रोता की ओर इंगित करते हुए)

क्या तुम्हें लोगों के सामने बोलने में डर लगता है?

प्र: हाँ।

आचार्य: अच्छा, अभी यहाँ करीब दो-सौ लोग मौजूद हैं, पर क्या अभी, इस वक़्त, जब तुम मुझसे बात कर रहे हो, तुम्हें डर लग रहा है?

प्र: नहीं।

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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