वो गहरी ईच्छा

February 12, 2021 | आचार्य प्रशांत

आचार्य प्रशांत: मन में सब कुछ विनाशी है पर कामना बहुत है मन को अविनाशी की। मन अज्ञान से भरा हुआ है, उसी को अंधकार कहते हैं पर कामना बहुत रहती है हमको ज्ञान की, प्रकाश की। देखा है कितने सवाल पूछते हैं हम? देखा है छोटा बच्चा भी इधर-उधर हाथ-पाँव फेंकता रहता है, कोई नई चीज़ हो उसे छूने की कोशिश करता रहता है। यह भी एक तरीके की ज्ञान की प्यास ही है जो कि बहुत ही आरंभिक रूप में—यह भी कह सकते हो कि विकृत रूप में अभिव्यक्त हो रही है।

जानना हम चाहते ही हैं, और क्या जानना चाहते हैं हम? सत्य से नीचे कुछ नहीं। अपनी आम बोलचाल की भाषा में भी हम दूसरे से पहली बात तो कुछ पूछते हैं—कोई है यहाँ पर जो रोज ही दूसरों से दस सवाल न पूछता हो? कोई भाषा है ऐसी जिसमें प्रश्न चिन्ह न होता हो? पहली बात तो हम पूछते हैं, हम जिज्ञासु हैं, और दूसरी बात जब हम किसी से कुछ पूछते हैं तो साथ ही कहते हैं: सच-सच बताना। क्या कहते हैं? सच-सच बताना। माने हमें जानना है। साबित होता है इससे कि हम पूछते हैं और दूसरी बात हमें क्या जानना है? सच जानना है।

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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