बुद्धि के स्तर पर मनुष्य पशुओं के ही समान है || श्रीदुर्गासप्तशती पर (2021)

January 5, 2022 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: क्या बुद्धि और प्रकृति एक ही तल पर हैं?

आचार्य प्रशांत: प्रकृति का छोटा सा अवयव है बुद्धि।

प्र: और अभी मनुष्यों में भी प्रकृति जो है बुद्धि के माध्यम से ही अभिव्यक्ति पा रही है।

आचार्य: प्राकृतिक ही है बुद्धि। देखो न, इतने जीवो को देखो, सबकी बुद्धि उनकी देह माया के अनुरूप होती है। कुत्ते की एक तरह की बुद्धि है, तोते की दूसरे तरह की बुद्धि है। क्यों? क्योंकि तोता शरीर से तोता होता है और कुत्ता शरीर से कुत्ता है। तो प्रकृति के अनुसार ही बुद्धि चलती है। बुद्धि कोई प्रकृति से बाहर की बात नहीं, छोटी सी चीज़ है प्रकृति की सीमाओं के अंदर।

प्र: बुद्धि को या इंटेलेक्ट को इस तरीके से देखा जाता है जो जानवरों के पास नहीं है।

आचार्य: यह मनुष्य की दुर्बुद्धि है कि वह सोचता है कि सिर्फ़ उसी के पास बुद्धि है। ऋषि ने और क्या बोला यहाँ राजा को? कि हाँ, समझदार तो तुम हो लेकिन तुम्हारे जितनी समझदारी तो यह सब मेरे जो गाय, भैंस और हिरण और खरगोश हैं, इनमें भी है।

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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