अतीत कड़वा है, तो वर्तमान मीठा कैसे हो?

May 26, 2021 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: सर जी, कृपया बताएँ कि अतीत के कड़वे अनुभवों के साथ वर्तमान को मिठास से कैसे जिया जाए?

आचार्य प्रशांत: बाबा, अतीत के कड़वे अनुभव होते ही इसीलिए हैं ताकि तुम वर्तमान को मिठास से जी सको। देखो तुम्हारे प्रश्न में एक मान्यता, एक अज़म्पशन है। वो अज़म्पशन ये है कि अतीत के कड़वे अनुभव नहीं होते, तो वर्तमान बड़ा मीठा होता। तो इसलिए इस मान्यता पर चलकर तुम कह रहे हो, “मुझे तो अतीत में कड़वे अनुभव हो गए हैं न, अब वर्तमान में मिठास कहाँ से लाऊँ?" जैसे कि न हुए होते कड़वे अनुभव, तो वर्तमान में मिठास होती। नहीं, तुम जीवन के बारे में कुछ मूल बातें शायद समझ नहीं रहे हो। समझना।

वर्तमान, जैसा हमको प्रकृति ने बनाया है उसके चलते, कड़वा होना तय है। ये जो बच्चा पैदा होता है न, ये इस तरीके से निर्मित नहीं होता कि इसको मुफ्त में ही मीठा वर्तमान मिल जाए। ये अगर ज्ञान ना पाए, जीवन से या ग्रंथो से, गुरुओं से सीखे नहीं, तो इसके वर्तमान का एक-एक पल कड़वा ही होगा। ये निश्चित ही है, क्यों निश्चित है? इसलिए निश्चित है क्योंकि तुम्हारी जो चेतना है न वो तुम्हारी ज़िन्दगी से कभी संतुष्ट नहीं हो सकती।

इंसान बनाया ही ऐसा गया है। इंसान इस मामले में बिलकुल अनूठा है। प्रकृति में जितने भी बाकी जीव-जंतु देख रहे हो, ये संतुष्ट रहते हैं जैसा इनका शारीरिक जीवन है उसी भर से। गाय को देखो, वो घास चरेगी, इसके बाद इधर-उधर रहेगी, कहीं जाकर बैठ जाएगी। भैंस को देखो, जाकर पानी में खड़ी हो गई।

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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