एक नाम ऐसा भी

April 29, 2021 | आचार्य प्रशांत

आचार्य प्रशांत: पूछा है कि, "कबीर साहब कह गए हैं कि;

कोटि नाम संसार में, तासे मुक्ति ना होए।
आदि नाम जो गुप्त है, बूझे बिरला कोए।।
~कबीर साहब

तो इसमें किस नाम की बात हो रही है? फिर आगे कहते हैं कि ऐसे ही तुलसीदास कह गए हैं कि "कलयुग बस नाम अधारा।" ये कौन सा गुप्त नाम है जिसके बारे में सन्त जन कह रहे हैं कि कोटि नाम संसार में, तासे मुक्ति ना होए, आदि नाम जो गुप्त है, बूझे बिरला कोए?"

देखो, कुछ बातें तो इन पंक्तियों से ही स्पष्ट हैं, "कोटि नाम संसार में, तासे मुक्ति ना होए।" संसार में हज़ारों लाखों नाम हैं, उनसे मुक्ति नहीं होती है। तो जिस विशेष नाम की बात हो रही है, वो कोई सांसारिक नाम तो हो नहीं सकता। वो कोई सांसारिक नाम नहीं हो सकता, सांसारिक नाम तो बहुत हैं। संसार में किन चीज़ों के नाम हैं जो तुम्हारे मन के क्षेत्र में आ सकते हैं? मन के क्षेत्र में जो कुछ भी आ सकता है, वो बिना नाम के नहीं हो सकता, चाहे वो भाव हो, विचार हो, घटना हो, अतीत हो, भविष्य हो, वस्तु हो, जगह हो, कल्पना हो, व्यक्ति हो, कुछ हो, जिसका तुम चिंतन कर सकते हो, वही पाया जाएगा संसार में। संसार में कुछ ऐसा नहीं मिलेगा जिसका तुम चिंतन नहीं कर सकते। यहाँ तक कि संसार में अगर कुछ ऐसा है जो अभी तक तुम्हारे सामने नहीं आया है लेकिन उसके आने की संभावना है, तो उसको भी नाम दिया जा सकता है, वो भी तुम्हारे ही मन का एक हिस्सा है, जो अभी तक तो प्रकट नहीं हुआ है वस्तु के रूप में, लेकिन उसके प्रकट होने की संभावना है, उसको भी नाम दिया जा सकता है।

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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