इनकी हैसियत नहीं संस्कृत का सम्मान करने की || आचार्य प्रशांत (2020)

October 19, 2020 | आचार्य प्रशांत

आज कोई व्यक्ति है, जो मान लो बहुत आस्थावान नहीं है, जिसकी धर्म में, अध्यात्म में बहुत आस्था नहीं है, वह संस्कृत क्यों सीखे? वह तभी सीखेगा जब उसमें इतनी चेतना होगी कि वह जानना चाहे भारतीय दर्शन के बारे में, इतिहास के बारे में, संस्कृति के बारे में, और तमाम भारतीय भाषाओं के बारे में, क्योंकि संस्कृत तमाम इंडो-यूरोपियन भाषाओं की माँ जैसी है।

सिर्फ़ तब तुम संस्कृत को सम्मान दे पाओगे।

Share this article:


ap

आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

सुझाव