वृत्ति न अच्छी न बुरी, महत्वपूर्ण यह है कि वो समर्पित किसको है || श्रीदुर्गासप्तशती पर (2021)

January 11, 2022 | आचार्य प्रशांत

आचार्य प्रशांत: ऋषि कहते हैं – “चंड और मुंड नामक दैत्यों के मारे जाने तथा बहुत सी सेना का संहार हो जाने पर दैत्यों के राजा प्रातापी शुम्भ के मन में बड़ा क्रोध हुआ और उसने दैत्यों की सम्पूर्ण सेना को युद्ध के लिए कूच करने की आज्ञा दी। वह बोला, ‘आज उदयुद्ध नाम के छियासी दैत्य सेनापति अपनी सेनाओं के साथ युद्ध के लिए प्रस्थान करें। कुम्भ नाम वाले दैत्यों के चौरासी सेनानायक अपनी वाहिनी से घिरे हुए यात्रा करें’।”

“पचास कोटिवीर्य कुल के और सौ धौम्र कुल के असुर सेनापति मेरी आज्ञा से सेना सहित कूच करें। कालक, दौर्हृद, मौर्य और कलकेय असुर भी युद्ध के लिए तैयार हो मेरी आज्ञा से तुरंत प्रस्थान करें। भयानक शासन करने वाला असुरराज शुम्भ इस प्रकार आज्ञा के सहस्त्रों बड़ी-बड़ी सेनाओं के साथ युद्ध के लिए प्रस्थित हुआ।”

“उसकी अत्यंत भयंकर सेना आती देख चंडिका ने अपने धनुष की टंकार से पृथ्वी और आकाश के बीच का भाग गुंजा दिया। राजन! तदनंतर देवी के सिंह ने भी बड़े ज़ोर-ज़ोर से दहाड़ना आरंभ किया, फिर अंबिका ने घण्टे के शब्द से उस ध्वनि को और भी बढ़ा दिया। धनुष की टंकार, सिंह की दहाड़ और घण्टे की ध्वनि से सम्पूर्ण दिशाएँ गूँज उठी। उस भयंकर शब्द से काली ने अपने विकराल मुख को और भी बढ़ा लिया तथा इस प्रकार वे विजयिनी हुईं।”


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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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