असफल होने पर यदि हिम्मत टूटने लगे

April 10, 2021 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: सर, जीवन में ऐसी परिस्थितियाँ आती है जब अपने लक्ष्य के लिए पूरी मेहनत करने के बावजूद सफलता नहीं मिलती, हिम्मत पूरी तरह से टूट जाती है। ऐसे में कुछ भी करने का मन नहीं करता, कोई मोटिवेशन काम नहीं आता। ऐसी परिस्थिति से बाहर कैसे निकलें?

आचार्य प्रशांत: दो अलग-अलग स्थितियाँ हैं ये जिनकी आपने चर्चा करी है। एक तो बात ये हो सकती है कि जो आपने लक्ष्य उठाया है, जिस काम में असफलता मिली है, वो काम ही ऐसा नहीं था कि उसमें आपको सफलता भी मिल जाती तो आप पर वास्तव में कोई बड़ा फर्क पड़ जाता। और दूसरा हो सकता है कि आपने जो काम उठाया है वो काम वाकई बहुत कीमती, बहुत ऊँचे दर्जे का था।

तो सवाल सफलता-असफलता को, और निराशा को ले करके है। मैं इस सवाल को और थोड़ा पीछे ले जा रहा हूँ। मैं यहाँ पर ले जा रहा हूँ कि, "किस काम में मिली है सफलता या असफलता?" मेरे समझ से वो प्रश्न ज़्यादा ज़रूरी है पूछना।

सफल हुए, असफल हुए ये थोड़ा बाद की बात है। ज़्यादा पहले की बात ये है कि किस काम में सफल हुए या असफल हुए। तो कौन-सा काम चुना था और कैसे चुना था इस पर गौर करो। पूछो अपने-आपसे।

तुम्हें कैसे पता कि तुम जिस काम में लगे थे, जिस लक्ष्य के पीछे लगे थे वो करने लायक था ही, ये तुम्हें कैसे पता? क्योंकि अगर करने लायक होता है कोई काम तो इंसान उसको छोड़ नहीं सकता। वो उस काम के आगे मजबूर हो जाता है। तुम्हें करना ही पड़ेगा। वो एक तरीके से नहीं हो रहा है, तुम दूसरे तरीके से करोगे। तुम्हें जीवन भर भी असफलता मिलती रहे, तो भी तुम लगे रहोगे। तुम अपना मन, बुद्धि, सारी ताकतें लगा दोगे रास्ता खोजने के लिए कि "कैसे आगे बढ़ता रहूँ? कैसे आगे बढ़ता रहूँ! हो सकता है अंत तक नहीं पहुँच पाऊँ…

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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