धार्मिक किताबें सीधी भाषा में क्यों नहीं होतीं? || आचार्य प्रशांत, आइ.आइ.टी बॉम्बे के साथ (2020)

October 15, 2020 | आचार्य प्रशांत

आध्यात्मिक है अगर ग्रंथ, तो श्लोक तुम से शुरू होता है और अनंत तक जाता है। श्लोक अपने आप में एक पूरा विस्तार होता है।

भाषा के तल पर वह तुम से जुड़ा हुआ है और अंत के तल पर, उद्देश्य के तल पर, वह अनंत तक जाता है।

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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