मोटिवेशन का बाज़ार गर्म है!

April 15, 2021 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मोटिवेशन इतना क्यों चलता है? हर हफ्ते कोई नया वीडियो आ जाता है, जैसे, “आग लगा देंगे! आसमान गिरा देंगे!" बुकस्टोर्स में भी ऐसी ही किताबें बिक रही होती हैं। ये मोटिवेशन का चक्कर क्या है?

आचार्य प्रशांत: मोटिवेशन क्या है ये समझ लेंगे, पहले ये याद करो कि जिंदगी में वो कौन से काम थे जिसमें तुम्हें मोटिवेशन की ज़रूरत बिलकुल भी नहीं पड़ी? तुम्हारा कोई दोस्त कभी किसी मुसीबत में था या ज़रूरत में था या अस्पताल पहुँच गया था तो तुम्हें ज़रूरत पड़ी थी क्या कि तुम्हें कोई मोटिवेट करे कि, "जा दोस्त की मदद कर या अस्पताल उसको पहुँचा या अस्पताल में उसको देख कर के आ"? या इसी तरीके से घर में कोई आकस्मिक स्थिति बन पड़ी हो तो क्या उसमें तुम्हें कोई बाहर वाला चाहिए होता है कि, "आ चल उठ, सो मत, कुछ करके दिखा"?

वहाँ तो सोए भी रहते हो तो खुद ही चद्दर फेंक भागते हो न? लेकिन पाते हो कि और जो काम होते हैं ज़िंदगी के उसमें तुमको मोटिवेशन चाहिए होता है कि कोई और आए उत्साहित करे, हवा भरे, पीछे से कोई धक्का दे, वजह क्या है?

वजह ये है कि पता नहीं है। पता नहीं है कि क्या करना ज़रूरी है। पता है भी तो थोड़ा बहुत तो पक्का नहीं है। इन दोनों को याद रख लो; पता नहीं है, पक्का नहीं है। नहीं जानते चूँकि कि क्या करना ज़रूरी है बिलकुल, इसलिए फिर तुम्हें कोई बाहर वाला चाहिए जो आकर के तुमको बीच-बीच में जैसे स्कूटरों में किक मारी जाती है वैसे ही किक मारता रहे और ऐसी स्कूटर है जो किक खा करके थोड़ी देर चलती है फिर बंद हो जाती है।

बाहरी प्रेरणा की, बाहरी उत्साह की जरूरत पड़ती ही तब है जब भीतर जो उत्साह का, ऊर्जा का स्रोत है वो ठप्प पड़ा हो।

तुम पूछोगे कि, "अगर हमें पता नहीं है, पक्का नहीं है तो हम जो कुछ भी कर रहे हैं वो करते ही क्यों है?" भाई, आप कुछ काम कर रहे हो उसी के लिए तो आप मोटिवेशन माँगते हो न बार-बार? तो जायज़ सवाल है कि जब जानते नहीं, समझते नहीं तो हम वो काम कर ही क्यों रहे हैं?

वो काम आप इसलिए कर रहे हो क्योंकि आप डरे हुए हो वर्ना कोई और तो वजह हो ही नहीं सकती न।

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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