आप जानते हैं शिव का अपमान करने वालों को? || (2021)

October 16, 2021 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपको सुनने से पहले मैं एक भजन सुनता था उसमें बोलते थे कि "सिर से तेरी बहती गंगा, काम मेरा हो जाता चंगा, नाम तेरा जब लेता।" तो भजन सुनते-सुनते मुझे लगता था कि मैं महादेव के कुछ नज़दीक हो गया हूँ और अब मेरा काम चंगा हो जाएगा। लेकिन मेरी लाइफ का ग्राफ ऊपर से नीचे जा रहा था तो मैं सोचता था कि शायद भजन कम सुन रहा हूँ। तो मैं और भजन बढ़ा देता था लेकिन ग्राफ और नीचे चलता चला जा रहा था। इस तरह के भजन जो मीनिंगफुल (अर्थपूर्ण) नहीं होते, उसमें मनोरंजन तो है लेकिन अब उसमें महादेव का नाम आ जाता है तो ये समझ में नहीं आता कि ये धार्मिक है कि नहीं।

आचार्य प्रशांत: देखिए, इस वक़त जितना अपमान, दुर्भाग्यवश, महादेव शिव का कर रहे हैं उससे ज़्यादा किसी का नहीं। शिव को खिलवाड़ बना लिया है, बिलकुल उनके नाम पर जो बोलना है बोलो, उनके नाम पर जो कुछ भी कहना है कहते रहो, उनके नाम पर यूँ ही अपनी कुछ बात फ़ैला दो कि ऐसा कर दो वैसा कर दो। शिव क्या हैं, शिवत्व क्या है, दूर-दूर तक कोई समझ नहीं, कुछ नहीं। और ये बहुत-बहुत बुरे लक्षण हैं। ये लक्षण आपदा के हैं। इससे ज़बरदस्त संकट आना है, आ गया है क्योंकि जो सबसे ऊँचा है अगर आपने उसी के नाम के साथ खिलवाड़ कर लिया तो अब क्या बचा आपके लिए?

अभी कोई मेरा वीडियो रहा होगा जिसमें मैंने कहा कि धर्म और दूध का जो व्यर्थ रिश्ता बना रखा है उसको ख़त्म करो।

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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