कितना कमाएँ, किसलिए कमाएँ?

May 5, 2021 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जो आप कमाई की बात कर रहे हैं कि "जो समय बीत रहा है उसमें कमाई क्या करी?" तो, क्या इसका मतलब सिर्फ जो ये षडरिपु हैं, इनसे छुटकारा है?

आचार्य प्रशांत: बस यही, और कुछ भी नहीं, कुछ भी नहीं। असल में, कमाई का और कोई अर्थ होता भी नहीं है।

कबीरा सो धन संचिए, जो आगे को होय।

जो तुम्हें आगे ले जा सके, किससे आगे ले जा सके? शरीर से, प्रकृति से जो आगे को ले जा सके, उसी का नाम धन है। धन और कुछ नहीं होता। रुपये, पैसे, करेंसी (मुद्रा) को धन नहीं कहते, भाई। धन की जो व्युत्पत्ति भी है, वो क्या है?

जो तुम्हें धन्यता देदे, सो धन।

इसीलिए परमात्मा को संतजन क्या बोलते हैं? धनी साहब। क्या नाम बोलते हैं उनका? धनी।

कबीर साँचा सूरमा, लड़े धनी के हेत।
पुरजा-पुरजा कट मरे, तबहुँ ना छाड़े खेत।।

ये "लड़े धनी के हेत" माने क्या? पैसा लेकर लड़ता है? मर्सनरि (भाड़े का सैनिक) है? ये कैसी बात हो गई?

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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