जीवन में क्या चुन रहे हो, गौर करो || आचार्य प्रशांत (2019)

प्रश्न: आचार्य जी, प्रणाम। आचार्य जी, आपने अभी होश के सम्बन्ध में बातें कहीं कि सही होश वो नहीं है कि आप अपने विचारों और कर्मों के प्रति होशपूर्ण रहें, सही होश वो है कि आप किसी ऊँचे को, स्वयं को सौंप दें। फ़िर जो होगा, उसे देखकर आप भी अचम्भित हो जाएँगे। लेकिन मैं जब कृष्णमूर्ति को पढ़ रहा था, तो उन्होंने चॉइसलेस अवेयरनेस (निर्विकल्प होश) की बात कही है।

वो कहते हैं, “जस्ट बी अवेयर (सिर्फ़ होशपूर्ण रहें)। जो आप सोच रहे हैं, या आपके भाव हैं, या आपके कर्म हैं, उसके प्रति।” वो कहते हैं कि अगर सिर्फ़ होशपूर्ण रहें, वो स्वतः परिवर्तन आता है। लेकिन आप होश के विषय में कुछ अलग कहते हैं, मुझे ऐसा लगा। तो कृष्णमूर्ति जो कह रहे हैं …..

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