तुम्हारी मुक्ति से बड़ा कुछ नहीं || आचार्य प्रशांत (2019)

प्रश्न: आचार्य जी, अगर मुझे लगता है कि स्वयं के प्रयास करके मुझे मुक्ति मिलेगी, तो उसमें एक तो मानसिक बंधन होते हैं, वो तो मैं अपने स्तर पर हटा सकता हूँ। लेकिन मान लीजिए कुछ ऐसे बंधन हैं, जैसे देश का क़ानून किसी चीज़ की आज्ञा नहीं देता, और वही बात मुक्ति में बाधा बन जाए, तो ऐसे में क्या करना चाहिए?

आचार्य प्रशांत जी: अगर वाकई-वाकई ऐसी स्थिति आ गई है कि तुम्हारी मुक्ति में देश का क़ानून बाधा बन रहा है, तो छोड़ दो देश।

प्रश्नकर्ता १ : कुछ भी करके, मेहनत करके?

आचार्य प्रशांत जी: देश बड़ा होता है, पर मुक्ति से बड़ा नहीं।

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