आओ तुम्हें जवानी सिखाएँ || आचार्य प्रशांत (2020)

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, “जवानी अकेली दहाड़ती है शेर की तरह”—आपकी यह पंक्ति जब से सुनी है, तब से ख़ुद को युवा कहने में शर्म आती है। मुझ में उत्साह की कमी है। वो धार नहीं है जो इस उम्र में होनी चाहिए। किसी भी कर्म में डूबने की कोई प्रेरणा नहीं है। डॉक्टर से मिलता हूँ तो वो कहते हैं—“दवाई लो”; पर मुझे दवाई नहीं लेना। मैं आपके पास आया हूँ, कृपया मुझे सच्चा यौवन सिखाएँ।

आचार्य प्रशांत: यौवन का क्या अर्थ है? उसी अर्थ से शुरू कर लो जो हम सामान्यतया लेते हैं। जब हम कहते हैं 'जवानी', या 'जवान व्यक्ति', तो आंखों के सामने क्या छवि आती है? शारीरिक रूप से जवान कोई व्यक्ति न? बीस या पच्चीस की उम्र का, अट्ठारह या तीस की उम्र का, उसको हम कह देते हैं कि, "जवान है।" है न? जवानी की ख़ासियत क्या होती है? अभी हम जवानी के उसी अर्थ को ले रहे हैं जो सामान्यतया प्रचलित है। उस अर्थ में भी जवानी की ख़ासियत क्या होती है? या विशेष लक्षण क्या होते हैं?

प्रश्नकर्ता: ऊर्जा से भरा हुआ।

आचार्य प्रशांत: ऊर्जा। और? सपने। कहीं पहुंचने की लालसा और प्रीतम के प्रति आकर्षण, जिसको प्रचलित शब्दावली में 'प्रेम' कह दिया जाता है। क्या कह देते हैं—प्रेम। तो प्रेम, ऊर्जा, उमंग, सपने, ये सब लक्षण होते हैं जवानी के—साधारण तौर पर भी। इन्हीं शब्दों को जीवन में और गहराई से ले लो तो जवानी का जो मानसिक या आध्यात्मिक अर्थ है, वो भी स्पष्ट हो जाएगा।

जो शारीरिक रूप से जवान है, उसमें ऊर्जा है भिड़ जाने की, चल लेने की, चुनौतियों को स्वीकार कर लेने की। है न? जो आध्यात्मिक रूप से युवा है, उसमें ऊर्जा है अपने जीवन के बंधनों को काट देने की। जो शारीरिक रूप से युवा है, उसमें आकर्षण होता है दूसरे किसी आकर्षक, सुंदर शरीर के प्रति। जो मानसिक या आध्यात्मिक रूप से युवा है, उसमें आकर्षण होता है सौंदर्य मात्र के प्रति; वो जो वास्तव में सुंदर है। वो जिसमें शिवत्व है इसलिए सुंदर है—“सत्यम् शिवम् सुन्दरम्”।

इसी तरीक़े से—जो शारीरिक रूप से जवान है, आयु से जवान है, उसके पास हम कहते हैं कि सपने हैं। सपनों का क्या अर्थ होता है? कि अभी आस पास जो दिख रहा है, उससे दूर की, उससे आगे की कोई चीज़। है न? ये जो वर्तमान परिस्थितियाँ हैं, इनसे बेहतर कुछ जब आपकी आँखों में हो तब आपकी आँखों में कहा जाता है कि सपने हैं। है न? इसी तरीक़े से—जो आध्यात्मिक रूप से या मानसिक रूप से जवान आदमी होता है, उसकी आँखों में भी सपने होते हैं, पर उसका सपना और आगे का होता है। उसका सपना फिर जो आस-पास दिख रहा है, उससे बस आगे का ही नहीं होता, उससे ऊँचा भी होता है, उससे ऊपर के किसी तल का होता है। तो इसको कहते हैं —असली जवानी।

जब आप में सौंदर्य मात्र के प्रति अनुराग जग जाए, जब आप किसी ऐसी सच्चाई के प्रति आकर्षित होने लग जाओ, खिंचने लग जाओ, जो आपको अपने आस-पास कहीं दिखाई न देती हो, जब अपने प्रेम और अपने सपने से निष्ठा करने के लिए आपके पास अदम्य ऊर्जा-उत्साह भी हो, तब आप कहलाते हो कि आप वास्तव में जवान हो गए।

ये यौवन का असली अर्थ है।

इस यौवन में और आयुबद्ध शारीरिक जवानी में अंतर क्या है?

अंतर ये है कि जिस यौवन की बात हम कर रहे हैं, वो शरीर पर आश्रित नहीं है, इसीलिए आप आध्यात्मिक रूप से युवा हो सकते हो—किसी भी शारीरिक उम्र में। आप तेरह-चौदाह साल के हो तो भी आप आध्यात्मिक रूप से जवान हो सकते हो, और आप तेरासी-चौरासी साल के हो, तो भी आप आध्यात्मिक रूप से जवान हो सकते हो। शारीरिक उम्र पर जो जवानी आश्रित है, वो तो शरीर के साथ ढल जानी है। और जो जवानी मन की समझदारी से, मन की गहरी प्रेरणा से संबंधित है, वो तो मंज़िल पर पहुँच कर ही दम लेती है। वो कायम रहती है, वो ढलती नहीं जब तक कि उसे उसकी मंज़िल न मिल जाए।