सम्यक क्रोध || आचार्य प्रशांत (2019)

प्रश्न: आचार्य जी, अंदर जो क्रोध, हिंसा और लोभ के विचार आते हैं, क्या संकल्प करने से उनसे मुक्त हुआ जा सकता है?

आचार्य प्रशांत जी: क्रोध करो बंधनों के विरुद्ध। ऊर्जा उठे ग़ुलामी के विरुद्ध। अपने पास जो कुछ भी है, उसका प्रयोग एक ही दिशा में करो। क्रोध है, चलो कोई बात नहीं, सबके अपने प्राकृतिक गुणधर्म होते हैं। कुछ लोग जन्म से ही क्रोधी होते हैं। कोई बात नहीं। उस क्रोध का सही प्रयोग करना सीखो।

प्रकृति ने सबको कुछ-न-कुछ दिया है, थोड़ा अलग-अलग दिया है। किसी को संयम दिया है, किसी को क्रोध दिया है। किसी को बुद्धि दी है, किसी को स्मृति दी है। किसी को ये, किसी को वो। किसी को धन दिया है, किसी को निर्धनता दी है। जिसको जो कुछ भी मिला है, वो उसी का उपयोग करे अपने लक्ष्य के प्रति।

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