ज्ञानमार्ग, भक्तिमार्ग और कर्ममार्ग - हमारे लिए कौन सा उचित है? || आचार्य प्रशांत (2019)

प्रश्न: गीता में जो बातें कही गई हैं – ध्यान-योग, ज्ञान-योग, और कर्म-योग – ये तीनों सब के लिए उचित नहीं। लेकिन ये कैसे पता चले कि किसके लिए क्या उचित है?

आचार्य प्रशांत जी: तीन नहीं, अट्ठारह बातें कहीं गईं हैं। भगवद्गीता में, अट्ठारह अध्यायों में, अट्ठारह प्रकार के योग हैं। और अट्ठारह पर भी गिनती रुक नहीं जाती।

जितने प्रकार के चित्त हो सकते हैं, जितने तरह के मनुष्य हो सकते हैं, और उन मनुष्यों की जितनी तरह की आंतरिक स्थितियाँ हो सकती हैं, सबके समकक्ष योग का एक विशिष्ट प्रकार रखा जा सकता है। तो अट्ठारह को ‘अनंत’ जानो। अनंत भाँति के योग हैं। तुम्हारे लिए कौन-सा अनुकूल है? अपने चित्त की दशा देखो।

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