अंग्रेज़ी के सामने हिंदी कैसे बचेगी और बढ़ेगी? || आचार्य प्रशांत (2019)

अगर आप यह सोचेंगी कि एक ही शिक्षा है, वो जो स्कूल-कॉलेज में दी जा रही है, तो आपको लगेगा - अरे, अरे, अरे, अंग्रेज़ी छा गई, अंग्रेज़ी छा गई। वही भर शिक्षा थोड़े ही है। हम भी तो शिक्षा दे रहे हैं, और यह असली शिक्षा है।

और ये जो असली शिक्षा है, यह भारत की मिट्टी की भाषाओं में ज़्यादा खूबसूरती से दी जा सकती है। बहुत अंग्रेज़ी पढ़ा-लिखा इंसान होगा हिंदुस्तान में, ऐसा भी होगा जो देवनागरी लिखना ही भूल गया हो, 'क' न लिख पाता हो अब, वो भी गाने तो मोहम्मद रफ़ी के ही सुनता है। भारत के एक-से-एक भूरी चमड़ी वाले अंग्रेज़ हैं, गाली तो वो भी हिंदी में ही देते हैं।

तो आप चिंता मत करिए।

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