तुम्हारा दुश्मन तुम्हारे भीतर बैठ शासन कर रहा है || आचार्य प्रशांत (2019)

उल्टी ताक़तें जब तक बाहर की हैं तब तक कोई ख़तरा नहीं। बाहर की उल्टी ताक़त आप पर अगर हावी होती है तो इसलिए क्योंकि उसने आपके भीतर अपना एक सहायक, एक मित्र खड़ा कर दिया है।

बाहर के बैरी आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाते अगर आपके अंदर आपका बैरी न बैठा होता।

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