गुलामी चुभ ही नहीं रही, तो आज़ादी लेकर क्या करोगे? || आचार्य प्रशांत (2020)

ये जो भीतर वाला है न, जिसको 'मैं' बोलते हो, ये बाहरी से ज़्यादा बाहरी है। और इससे ज़्यादा घातक कोई नहीं है तुम्हारे लिए। इसीलिए बार-बार बोलता हूँ कि बाहर से तो बाद में बचना, पहले तुम ख़ुद से बचो, अपने-आप से बचो, जो तुम्हारे भीतर बैठा है, उससे बचो। वही दुश्मन है तुम्हारा; वही ज़हर है तुम्हारा।

वो जो तुम्हारे भीतर बैठा है तुम्हारी 'बुद्धि' बनकर, जो तुम्हारे भीतर बैठा है 'मैं' बनकर, वो जो भीतर बैठा है तुम्हारा 'सलाहकार' और 'शुभचिंतक' बनकर, वो तुम्हारा सबसे बड़ा बैरी है।

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