प्रेम हो तो स्पष्टता आ जाती है || आचार्य प्रशांत (2019)

प्रश्न: आध्यात्मिक साधना की प्रक्रिया में कई बार घरवालों के, मित्रजनों के कई प्रश्नों का सामना करना पड़ रहा है। मुझे पाँच वर्ष हो गए, पर अभी तक मुझमें इतनी स्पष्टता नहीं आई है कि मैं उनके प्रश्नों का उत्तर दे सकूँ।

आचार्य जी, कृपया आप इसमें मेरी मदद करें ।

आचार्य प्रशांत जी: स्पष्टता नहीं चाहिए, प्रेम चाहिए। जो कर रहे हो, अगर वो आपको दिलोजान से प्यारा हो, तो तकलीफ़ क्या होगी किसी को नहीं भी समझा पाए तो?

अभी आपकी समस्या ये नहीं है कि आपको स्पष्टता नहीं है। आपको बुरा तब लगता है जब कोई प्रश्न करता है, और आप कोई जवाब नहीं दे पातीं। मतलब आप महत्त्व देती हैं दूसरे व्यक्ति को, मतलब आप महत्त्व देती हैं दूसरे व्यक्ति को समझाने को।

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