धोखा देकर शारीरिक संबंध बनाने वाले || आचार्य प्रशांत (2020)

ज़िंदगी इन सब चीज़ों के लिए नहीं होती। जो लोग देह भाव में जीते हैं, उनका वही अंजाम होता है जो तुम्हारा हो रहा है। वो दूसरों की देह को देखकर फँस जाते हैं, और फिर अपनी ही देह को कष्ट देते हैं। ये दो तरफ़ा उन पर चोट पड़ती है। ज़िंदगी शरीर बन कर मत गुज़ार दो; वो बर्बादी है।

जानो कि तुम इसलिए हो ताकि तुम मानसिक तौर पर ऊँचे-से-ऊँचा उठ सको और यही जीने का मक़सद होता है। हम इसलिए नहीं पैदा हुए हैं कि अपना शरीर चमकाएँगे, दूसरों का शरीर भोगेंगे या दूसरों के भोग का कारण बनेंगे। हम इसलिए पैदा हुए हैं ताकि चेतना के तल पर, समझदारी के तल पर, होश के तल पर ऊँचे-से-ऊँचा उठ सकें।

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