सिर्फ़ ऐसे बच सकते हो अवसाद (डिप्रेशन) से || आचार्य प्रशांत (2019)

October 14, 2020 | आचार्य प्रशांत

दो होते हैं, और दोनों एक दूसरे से जुड़े होते हैं, बात को साफ़ समझ लीजिएगा। दुःख की हर स्थिति में दो होते हैं: एक दुःख देने वाला, दूसरा दुःख सहने वाला। ये दोनों एक ही सिक्के के पहलू होते हैं; एक के बिना दूसरा हो नहीं सकता।

दुःख, पीड़ा, कष्ट की हर स्थिति में, हर मामले में इन दो को आप मौजूद पाएँगे: वो स्थितियाँ जिन में दुःख का अनुभव हुआ, और वो इकाई जो दुःख का अनुभव करती है—ये दो लगातार मौजूद रहेंगे। तो जब भी आपको उपचार करना होगा, इन्हीं दो में से किसी एक का करना होगा। किसी एक का उपचार कर लो, दूसरे का अपने आप हो जाता है, क्योंकि ये दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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