इतनी शोहरत इतनी कमाई, फिर भी उदासी और तन्हाई

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मेरा जन्म एक गरीब परिवार में हुआ। जब मैं सिर्फ आठ साल का ही था तो मेरे पिताजी की मृत्यु हो गई। बचपन से ही कोई भी दोस्ती नहीं करता था मुझसे। न मेरी शक्ल अच्छी न अक्ल, तो मैंने ऐसे काम करने शुरू किए जिससे लोग मुझसे आकर्षित हो सकें। कहीं से नाचना-गाना और कॉमेडी करना सीखा।

आज मैं एक सफल कोरियोग्राफर हूँ। मेरा एक यूट्यूब-चैनल भी है जिसमें तकरीबन आठ लाख से ऊपर सब्सक्राइबर हैं। इतने लोग होने के बावजूद भी फिर भी जीवन में अभी तक खुशी नहीं मिली। कुछ साल पहले एक लड़की से मुझे प्यार हुआ, मगर उसकी कुछ हरकतों के कारण मैं बहुत दुखी हुआ और मैंने दो बार आत्महत्या करने का प्रयास भी किया। सभी रिश्तों को बारी-बारी देखकर अब ऐसा लगता है कि किसी भी रिश्ते पर मैं भरोसा नहीं कर पाता। कृपया आप मार्गदर्शन कीजिए।

आचार्य प्रशांत: सच्ची खुशी न किसी लड़की से मिलेगी, न आठ लाख सब्सक्राइबर्स से। सच्ची खुशी तब है जब खुश रहने के लिए न लड़की की ज़रूरत हो, न सब्सक्राइबर्स की। हम्म? जिनके पास वो सब चीज़ें नहीं होतीं जो तुम्हारे पास हैं, उनको तो माफ़ किया जा सकता है, अगर उनको ये भ्रम हो कि कभी लड़की मिल जाएगी या शोहरत मिल जाएगी या पैसा या काम में सफलता तो भीतर से बड़ा उल्लास उठेगा। अक्सर होते हैं न लोगों को ऐसे भ्रम कि अभी तो ज़िन्दगी में मायूसी इसलिए है क्योंकि पैसा, शोहरत, सफलता, लड़की, ये सब नहीं है। पर तुम तो अब खेले-खाए जीव हो। फाउंडेशन के चैनल पर जितने सब्सक्राइबर हैं, उससे ज़्यादा तो तुम्हारे हैं। लड़की-इत्यादि भी कर ली। तो फिर तो जो बात मैं अभी कह रहा हूँ ये तुम्हें खुद ही समझ जाना चाहिए था। बहुतों के लिए तुम बड़े आदर्श होगे, होगे न? क्या करते हो? उसमें तुम्हारे अपने विडियोज़ रहते हैं?

प्र: उन विडियोज़ में डांस सिखाता हूँ।

आचार्य जी: तो उसमें चैनल में डांस सिखाते हुए तुम्हारे विडियोज़ रहते हैं?

प्र: हाँ जी, डांस करते हुए भी डांस सिखाता हूँ।

आचार्य जी: डांस करते हुए भी। तो इतने लोगों को सिखाया है, उसमें से कुछ को तो बहुत फ़ायदा भी हुआ होगा, सीख भी गए होंगे।

प्र: जी।

आचार्य जी: शायद सैकड़ों, शायद हज़ारों लड़के-लड़कियाँ तुम्हें आदर्श की तरह भी देखते होंगे।

प्र: हाँ गुरु जी, लिखते हैं कमेंट में।

आचार्य जी: कमेंट में लिखते होंगे। अब समझो कि हम सब कैसे भ्रमित हो जाते हैं। ये सब लड़के-लड़कियाँ जो तुम्हारे वीडियो देख कर के नीचे लिख रहे हैं, “आप बड़े ऊँचे हो। आप देखो हम सब में इतनी खुशियाँ बाँट रहे हो। आप के कारण हमें भी कुछ सफलता मिल रही है।” ऐसा ही लिखते होंगे न?

प्र: हाँ, गुरु जी, लिखते हैं।

आचार्य जी: हम्म! तो देखो उन्हें गलतफहमी हो गई न। (हँसते हुए)

अब समझो कि हम सब को ही कैसे गलतफहमी हो जाती है, ऐसे ही। अब आपके दिल की हालत क्या है वो तो हम मुठ्ठी भर लोग ही जान रहे हैं न यहाँ पर? अब आज के बाद बहुत सारे लोग जान जाएँगे, पर फिर भी भीतर का मामला क्या है वो तो हम चंद लोगों को ही फिलहाल पता चल रहा है। और तुम्हें देखने वाले बाकी लोग क्या देख रहे हैं? एक ‘स्क्रीन’।

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