इतनी शोहरत इतनी कमाई, फिर भी उदासी और तन्हाई

October 7, 2020 | आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। मेरी उम्र तीस वर्ष है। मेरा जन्म एक गरीब परिवार में हुआ। जब मैं सिर्फ आठ साल का ही था तब मेरे पिताजी की मृत्यु हो गई। बचपन से ही कोई भी दोस्ती नहीं करता था मुझसे। न मेरी शक्ल अच्छी न अक्ल, तो मैंने ऐसे काम करने शुरू किए जिससे लोग मुझसे आकर्षित हो सकें।

कहीं से नाचना-गाना और कॉमेडी करना सीखा। आज मैं एक सफल कोरियोग्राफर हूँ। मेरा एक यूट्यूब चैनल भी है जिसमें तक़रीबन आठ लाख से ऊपर सब्सक्राइबर्स हैं। इतने लोग होने के बावजूद फिर भी जीवन में अभी तक ख़ुशी नहीं मिली। कुछ साल पहले एक लड़की से मुझे प्यार हुआ, मगर उसकी कुछ हरकतों के कारण मैं बहुत दुखी हुआ और मैंने दो बार आत्महत्या करने का प्रयास भी किया। सभी रिश्तों को बाहरी-बाहरी देखकर अब मुझे ऐसा लगता है कि किसी भी रिश्ते पर मैं भरोसा नहीं कर पाता। कृपया मार्गदर्शन कीजिए।

आचार्य प्रशांत: सच्ची ख़ुशी न किसी लड़की से मिलेगी, न आठ लाख सब्सक्राइबर्स से। सच्ची ख़ुशी तब है जब खुश रहने के लिए न लड़की की ज़रूरत हो न सब्सक्राइबर्स की। जिनके पास वो सब चीज़ें नहीं होतीं जो तुम्हारे पास हैं, उनको तो माफ किया जा सकता है अगर उनको ये भ्रम हो कि कभी लड़की मिल जाएगी, या शोहरत मिल जाएगी, या पैसा, या काम में सफलता, तो भीतर से बड़ा उल्लास उठेगा।

अक्सर होते हैं न लोगों को ऐसे भ्रम कि अभी तो ज़िन्दगी में मायूसी इसलिए है क्योंकि पैसा, शोहरत, सफलता, लड़की ये सब नहीं हैं? पर तुम तो अब खेले-खाए जीव हो। संस्था के चैनल पर जितने सब्सक्राइबर्स हैं उससे ज़्यादा तो तुम्हारे हैं, लड़की इत्यादि भी कर ली। तो फिर तो जो बात मैं अभी कह रहा हूँ, ये तुम्हें खुद ही समझ जाना चाहिए था। बहुतों के लिए तुम बड़े आदर्श होगे। होगे न? क्या करते हो उसमें? तुम्हारे अपने वीडियोस रहते हैं?

प्र: उन वीडियोस में डांस सिखाता हूँ।

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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं।

आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानें

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