कैद में हो, जूझ जाओ! || आचार्य प्रशांत (2019)

होश का मतलब यही होता है — अपनी वर्तमान हालत के प्रति ईमानदारी।

असल में जानना भी नहीं, सिर्फ़ ईमानदारी। क्योंकि भाई जानते तो हम हैं ही। कौन है जो नहीं जानता?

हमें ज्ञान की नहीं ईमानदारी की कमी है।

हमें होश की नहीं साहस की कमी है।

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