दूसरों पर निर्भर गृहस्थ महिला कैसे बढ़े मुक्ति की ओर? || आचार्य प्रशांत, संत लल्लेश्वरी पर (2019)

जिसके भी आश्रित रहोगे, एक बात पक्का समझ लो, वो अध्यात्म का तुम्हें समर्थन तो नहीं ही करने देगा। कोई तुम्हें आश्रय इसलिए देता ही नहीं है कि तुम अपना मन किसी कृष्ण या किसी कबीर को दे दो। ऐसा कोई नहीं होता।

ऐसा अगर कोई मिल गया तुम्हें, जो तुम्हें आश्रय और सहारा देके भी तुम्हें भेज रहा हो कृष्ण और कबीर के पास, तो समझ लेना तुम्हें कृष्ण और कबीर ही मिल गए हैं।

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