कौन कमज़ोर कर रहा मेरे देश की युवा ताकत को || आचार्य प्रशांत (2020)

ऋषियों की विरासत को,

क्रांतिकारियों की शहादत को,

आज कौन कमज़ोर कर रहा मेरे देश की युवा ताक़त को?

एक वो थी २१ साल की जो जान पर खेल गई; एक ये हैं २१ साल के जो वीडियो गेम खेलते हैं। वो आज़ाद को नहीं जानता, वो बिस्मिल को नहीं जानता, वो सूर्य सेन को नहीं जानता, वो प्रितिलता को नहीं जानता, तो वो जानता किसको है?

अविरल प्रकाश हैं, २८ वर्षीय, कहते हैं, “सर, एक बड़े ज़रूरी मसले पर आपकी राय चाहिए। बात थोड़ी विस्तार में बताता हूँ। मैं दिल्ली की एक अपर मिडिल क्लास, ज्वाइंट फैमिली (उच्च मध्यम वर्गीय संयुक्त परिवार) से हूँ। उम्र मेरी २८ है। आज से २० साल पहले जब पापा, चाचा और बड़े भाइयों को देखता था घर में तो उनके व्यवहार और कैरेक्टर (चरित्र) में थोड़ी गंभीरता, थोड़ी गहराई, थोड़ा बड़प्पन होता था। हमें नाज़ होता था अपने घर के जवान लोगों की ताकत पर। आज २० साल बाद अपने टीनएज भांजों-भतीजों और कज़िंस को देखता हूँ जो १२ से २२ साल के हैं, तो पाता हूँ कि ये लोग ऊपर से तो कॉन्फिडेंट, एग्रेसिव और डिमाँडिंग हैं, पर भीतर से डरे हुए और कमज़ोर हैं। आपसे इसलिए पूछ रहा हूँ, क्योंकि आज दोपहर ही मेरे टीनएज भतीजे को सीवियर डिप्रेशन डायग्नोस हुआ है। और ये लड़का एकदम कूल और कॉन्फिडेंट बनकर घूमता था। इससे पहले घर का एक दूसरा टीनएज बच्चा शराब और ऑनलाइन सेक्स के मामले में कुछ दिन फँसा रहा। हमारी पढ़ी-लिखी कल्चर्ड फैमिली है, फिर भी ये लड़के घर में अब घटिया लैंग्वेज में बात करते हैं। कल्चरल और ग्लोबल अवेयरनेस उनकी ज़ीरो है। और अब ये डिप्रेशन का केस! हम शॉक में हैं। हमें तो पता ही नहीं चला ये क्या हो गया पिछले २० साल में। कौन ज़िम्मेदार है?”

अविरल, तुम्हारे घर में ही नहीं हो रहा, भारत में, दुनिया भर में हो रहा है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (अमेरिकन मनोवैज्ञानिक संघ) ने पाया कि इस १२-१३ साल की अवधि में ही टीनएजर्स में और जवान लोगों में डिप्रेशन के मामले ५२ प्रतिशत से ६३ प्रतिशत तक बढ़े हैं। बहुत चौकाने वाला आंकड़ा है ये। क्यों डिप्रेशन इतने ज़बरदस्त तरीक़े से फैला है युवाओं में और किशोरों में, टीनेजर्स में? तो स्टडी (अध्ययन) कहती है कि संभवतया कारण है सोशल-मीडिया। प्रोफेसर जीन ट्वेंगे हैं, उन्होंने किताब लिखी है, जिसका उन्होंने शीर्षक दिया है, “कॉन्फिडेंट, असर्टिव एंड एंटाईटेल्ड एंड मोर मिसरेबल देन एवर बिफोर (आत्मविश्वासी, निश्चयात्मक, अधिकारी, और पहले से ज़्यादा दुखी)”। उसमें उन्होंने बताया है ग्रेट इकोनोमिक डिप्रेशन था १९३० का, उस समय भी तनाव के, एंज़ायटी के जो स्तर थे युवाओं में, उससे भी पाँच गुना ज़्यादा तनाव है आज के युवा में। स्थिति ये है इस समय कि हर सौ मिनट में डिप्रेशन के कारण एक किशोर, एक टीनएजर आत्महत्या कर रहा है। बीस प्रतिशत टीनएजर्स कभी-न-कभी डिप्रेशन से होकर गुज़रे ज़रूर हैं। आत्महत्या की दर १९९० के दशक में कम हो रही थी, और २००० के बाद दुबारा बढ़ गई है। इतनी बढ़ गई है कि १५ से २४ आयु वर्ग के लोगों में, किशोरों में ये मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण है।