इस अकेलेपन की वजह और अंजाम जानती हैं ? || आचार्य प्रशांत (2019)

पिछली बार भी चेतावनी दी थी, फिर कह रहा हूँ, ज़िंदगी को, तुम्हें जो भी सबसे ऊँचे-से-ऊँचा उद्देश्य समझ में आता है, उसमें डुबो दो, नहीं तो तत्काल और घातक अंजाम होते हैं। ऐसी राहों पर निकल पड़ते हो कि फिर वापस नहीं लौट पाते, खासतौर पर हिंदुस्तान में।

यहाँ पर लौटने की गुंजाइश बड़ी कम होती है।

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