मार्क्स, पेरियार, भगतसिंह की नास्तिकता || आचार्य प्रशांत (2020)

जब भगत सिंह कहते थे कि वह नास्तिक हैं, तो वो वास्तव में परंपरागत धर्म, सड़े-गले धर्म, संस्थागत धर्म को नकार रहे थे।

नहीं तो एक ऊँचे आदर्श के लिए शरीर की आहुति दे देने से बड़ा धार्मिक काम क्या होगा।

अगर कोई नौजवान सच्चे अर्थों में धार्मिक हुआ है, तो वह तो भगत सिंह हैं!