अपनी योग्यता जाननी हो तो अपनी हस्ती की परीक्षा लो

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, हाल ही में मुझे अभी वॉलन्टीयरिंग (स्वयं सेवा) का मौका मिला था तो मैं और मेरे सहयोगी ने तय किया कि हम आपके द्वारा जो पुस्तकें प्रकाशित हैं उनका स्टॉल लगाएँगे। जब वहाँ पहुँचा तो पाया कि इतने सारे लोगों में कौन इन किताबों का पात्र है ये कैसे समझा जाए। मुझे समझ नहीं आया और मैं ज़्यादा लोगों से खुलकर बात नहीं कर पाया।

आचार्य प्रशांत: पात्रता का निर्धारण परीक्षा के ही माध्यम से हो सकता है, हम्म? पानी में पानी मिला दो तो कुछ भेद पता चलेगा क्या? और पात्रता के निर्धारण का तो अर्थ ही है विवेकपूर्ण भेद कर पाना, है न? क्या भेद कर पाना? कि कौन 'सुपात्र' और कौन 'कुपात्र'। यही भेद करना चाहते हो न?

भेद करने के लिए जो परीक्षार्थी है उसको उसकी सामान्य स्थिति से भिन्न कोई स्थिति देनी पड़ेगी।

परीक्षा-भवन के बाहर सौ परीक्षार्थी खड़े हैं। सिर्फ़ उनको देख के ही क्यों नहीं तय कर देते कि इसमें से स्वर्ण-पदक, रजत पदक, कांस्य किसको दे देना है? नौ बजे सुबह परीक्षा आरंभ होती है—दो घंटे की है, ग्यारह बजे तक की। पौने-नौ बजे तुम पा रहे हो कि परीक्षा भवन के बाहर कितने खड़े हैं परीक्षार्थी? सौ। उन सौ में कुछ अंतर नज़र आ रहा है अभी क्या? अगर आ भी रहा है तो बहुत मामूली। कोई स्पष्ट भेद उनमें पता चल रहा है अभी? सभी बात कर रहे हैं, सभी के हाथ में किताबें हैं, सभी की उम्र भी करीब-करीब एक समान है। कई तरह के अंतर दिख रहे हैं पर कोई भी अंतर इतना स्पष्ट नहीं है कि तुम वहीं पर बता दो कि इसमें से कौन सुपात्र है और कौन नहीं है। क्या बता सकते हो?

लेकिन साढ़े-ग्यारह बजे सब बताया जा सकता है न? दो ही घंटे में ऐसा क्या बदल गया कि अब बिलकुल साफ हो गया कि कौन पात्र है और कौन नहीं? क्या बदल गया? परीक्षा ले ली। परीक्षा लिए बिना पात्रता का निर्धारण नहीं।

अब सवाल ये है कि अगर आप गए हैं लोगों में पुस्तकें वितरित करने या पुस्तकों का विक्रय करने तो वहाँ परीक्षा कैसे लें। वहाँ पर आपके व्यक्तित्व को ही परीक्षा-पत्र होना पड़ेगा। आपकी हस्ती को ही बहुत बड़ा प्रश्न होना पड़ेगा। इसीलिए मैंने कहा, “पानी में पानी मिले तो कोई भेद नहीं हो सकता”। जैसी भीड़ गुज़र रही है आपके पुस्तक स्टॉल के सामने से, अगर आप भी उस भीड़ जैसे ही हैं, तो पात्रता का कोई निर्धारण नहीं हो सकता। आप जैसे, वैसी ही दुनिया, दुनिया को आपमें कुछ अलग दिखेगा ही नहीं तो भेद का भी फिर कोई सवाल नहीं।

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