एक मुर्गे से सीख लेते थे आचार्य प्रशांत? (2020)

वैसे ही किसी भी पशु को देखो, बहुत कुछ पता चलेगा—पशु के बारे में कम, अपने बारे में ज़्यादा, क्योंकि वो जानवर हमारे भीतर भी मौजूद है। सब जानवर एक हैं, और सब जानवर हम में मौजूद हैं। सब जानवर हम में पूरे-पूरे मौजूद हैं। बस हम में कुछ ऐसा है जो जानवरों में नहीं है। हम में थोड़ी बेचैनी ज़्यादा है। जानवरों में इतनी बेचैनी नहीं होती है।

जानवरों को खाना-पीना वगैरह मिल जाए ठीक-ठाक, तो वो संतुष्ट रह जाते हैं; हम उतने में संतुष्ट रह नहीं पाते। हमें कुछ और चाहिए जीवन से। वरना अपनेआप को जानने का बहुत अच्छा तरीक़ा है—पेड़ को देख लो, पत्ते को देख लो, किसी भी जानवर को देख लो। यहाँ कि बंदरों को देख लो, बहुत कुछ जान जाओगे।

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