इनकी हैसियत नहीं संस्कृत का सम्मान करने की || आचार्य प्रशांत (2020)

आज कोई व्यक्ति है, जो मान लो बहुत आस्थावान नहीं है, जिसकी धर्म में, अध्यात्म में बहुत आस्था नहीं है, वह संस्कृत क्यों सीखे? वह तभी सीखेगा जब उसमें इतनी चेतना होगी कि वह जानना चाहे भारतीय दर्शन के बारे में, इतिहास के बारे में, संस्कृति के बारे में, और तमाम भारतीय भाषाओं के बारे में, क्योंकि संस्कृत तमाम इंडो-यूरोपियन भाषाओं की माँ जैसी है।

सिर्फ़ तब तुम संस्कृत को सम्मान दे पाओगे।