सब महापुरुष कभी तुम्हारी तरह साधारण ही थे || आचार्य प्रशांत (2019)

हम एक सुविधाजनक विभाजन करते हैं: साधारण लोग और असाधारण लोग।

और जो साधारण है, उसका काम है साधारण ही रह जाना। और जो असाधारण है, "उसको तो भाई दैवीय भेंट मिली हुई थी। वो तो जन्म से ही अद्वितीय था। उसपर तो ईश्वरीय अनुकम्पा थी।”

किसी पर कोई ईश्वरीय अनुकम्पा नहीं होती; सब अपना रास्ता चलते हैं, तय करते हैं।

जैसे आप चल रहे हो, वैसे ही मैं भी चला हूँ, वैसे ही सब चल रहे हैं।

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